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पंडित प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय। प्रताप नारायण मिश्र की प्रमुख रचनाएं। pratap narayan mishra ka jivan parichay. Pratap Narayan Mishra.

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  पंडित प्रताप नारायण मिश्र (Pandit Pratap Narayan Mishra) जीवन परिचय :-  भारतेंदु युग के प्रसिद्ध साहित्यकार पंडित प्रताप नारायण मिश्र का जन्म सन् 1856 ई० में उन्नाव जिले के बैजे नामक ग्राम में हुआ था। कुछ समय पश्चात इनके पिता पंडित संकटा प्रसाद मिश्र परिवार सहित कानपुर आकर बस गए इसलिए प्रताप नारायण मिश्र की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा कानपुर में हुई। इनके पिता एक प्रसिद्ध ज्योतिषी थे इसलिए इनके पिता इनको ज्योतिष विद्या सिखाना चाहते थे। परंतु ज्योतिष विद्या में इनका मन नहीं लगा इन्होंने स्वाध्याय से हिंदी, संस्कृत, उर्दू, फारसी आदि भाषाओं का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया इसी कारण से इन्होंने हिंदी साहित्य जगत् में को अमूल्य निधि के रूप में अनेक रचनाएँ प्रदान कीं। इन्होंने लग्न से हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे निबंध, नाटक, काव्य-संग्रह आदि विभिन्न विधा मैं अपना योगदान दिया। मित्र जी 38 वर्ष की अल्पायु में ही सन् 1894 ई० मैं इस संसार से विदा हो गए। कृतियाँ :-        1.निबंध-संग्रह-   प्रताप-पीयूष, निबंध-नवनीत, प्रताप-समीक्षा। 2. नाटक -  कलि-प्रभाव, हठी हम्मीर, गौ-संकट। 3. रूपक -  काली-कौत

Gauss ki pramey ( Gauss's Theorem ) गाॅस की प्रमेय क्या है? गाॅस की प्रमेय की उपपत्ति। गॉस की प्रमेय के अनुप्रयोग।

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गाॅस की प्रमेय  Gauss's Theorm कार्ल फ्रिडरिच गाॅस ने किसी बंद पृष्ठ से होकर जाने वाले वैद्युत फ्लक्स तथा पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल वैद्युत आवेश के बीच एक संबंध स्थापित किया, जिसे गाॅस की प्रमेय कहते हैं। KARL FRIEDRICK GAUSS इस प्रमेय के अनुसार – " किसी बंद पृष्ठ के अंदर रखे आवेश के कारण पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स उसके कुल आवेश का   1/ε0 गुना होता है।" उपपत्ति (Derivation) –   माना किसी r त्रिज्या वाले गोले के केंद्र पर एक बिंदु आवेश +q स्थित है तथा गोले के पृष्ठ पर एक सूक्ष्मतम क्षेत्रफल (dA) स्थित है जिसकी दिशा वैद्युत क्षेत्र की दिशा में है। तब- θ=0° सूक्ष्मतम क्षेत्रफल dA  गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स- dΦ = E dA COS θ             (चूँकि θ=0°) dΦ = E dA COS0° dΦ =E dA ×1                 (चूँकि COS0° = 1) dΦ = E dA                       –(1) सम्पूर्ण गौसियन पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स-                                यही गाॅस की प्रमेय है। गाॅस की प्रमेय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य :- किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स उसके आकार एवं आकृति पर निर्भ

कूलाम का नियम (Coulomb's law)। कूलाम के नियम का निगमन (Derivation of Coulomb's law)। kulam ka niyam

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कूलाॅम का नियम (Coulomb's law) Charles-Augustin de Coulomb फ्रांसीसी वैज्ञानिक कूलाॅम ने सन् 1785 ई० में प्रयोगों के आधार पर दो बिंदु आवेशों के बीच कार्यरत् वैद्युत बल के संबंध में एक नियम प्रस्तुत किया, जिसे " कूलाॅम का नियम " कहते हैं। इनके अनुसार–  " किन्ही दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला वैद्युत बल दोनों आवेशों के परमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनकी बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। " यदि दोनों आवेशों के बीच वायु या निर्वात उपस्थित है ,तब परावैद्युतांक  (k) का मान  (1) होता है। NOTE :-  परावैद्युतांक k का मान सबसे कम वायु या निर्वात के लिए 1 और अन्य पदार्थों के लिए 1 से अधिक होता है तथा धातुओं के लिए के का मान अनंत होता है। SI पद्धति में K=1/4πε० का मान लगभग 9×10⁹ Nm²/C² होता है। कूलाॅम के नियम का महत्व :- यह नियम किसी परमाणु में उपस्थित धनावेशित प्रोटॉनों और ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों के बीच कार्यरत वैद्युत बल की व्याख्या करता है। यह बल ही परमाणु के स्थायित्व के लिए उत्तरदायी है।  यह नियम परमाणुओं के बीच कार्यरत वैद्युत बलों की

Vaidyut aavesh Kise Kahate Hain? विद्युत आवेश क्या होता है? विद्युत आवेश किसे कहते हैं? विद्युत आवेश की परिभाषा। Vidyut aavesh ke paribhasha Hindi mein

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Vaidyut aavesh Kise Kahate Hain? विद्युत आवेश क्या होता है? विद्युत आवेश किसे कहते हैं? विद्युत आवेश की परिभाषा। Vidyut aavesh ke paribhasha Hindi mein            Vaidyut Aavesh    विद्युत आवेश   विद्युत आवेश - वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह छोटे-छोटे कणों को अपनी ओर आकर्षित करता है उसे वैद्युत आवेश कहते हैं।                                       अथवा जब दो वस्तुओं को आपस में रगड़ा जाता है तो उनके बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है जो वस्तु इलेक्ट्रॉन त्यागती है वह वस्तु धन आवेशित तथा जो वस्तु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है वह वस्तु ऋण आवेशित हो जाती है इस प्रकार वस्तुऐं आवेशित हो जाती हैं। Electric Charge ( विद्युत आवेश) दूसरे शब्दों में आवेश की परिभाषा:-                                          "द्रव्य का वह गुण जिसके कारण वह वैद्युत तथा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है तो उस गुण को आवेश कहते हैं इसे q से व्यक्त करते हैं।" सूत्र —                 q=±ne         जहाँ,    q = वस्तु पर आवेश                                           n = इलेक्ट्रॉनों की संख्या